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Wednesday, November 22, 2017

लघुकथा@Wikipedia

लघुकथा

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लघुकथा का मतलब छोटी कहानी से नहीं है, छोटी कहानी लघु कथा होती है जिसमें लघु और कथा के बीच में एक खाली स्थान होता है।

लघुकथा

हिंदी साहित्य में लघुकथा नवीनतम् विधा है। हिंदी की प्रथम लघुकथा के बारे में विभिन्न विद्वानों के विभिन्न मत हैं। हिंदी के अन्य सभी विधाओं की तुलना में अधिक लघुआकार होने के कारण यह समकालीन पाठकों के ज्यादा करीब है और सिर्फ़ इतना ही नहीं यह अपनी विधागत सरोकार की दृष्टि से भी एक पूर्ण विधा के रूप में हिदीं जगत् में समादृत हो रही है। इसे स्थापित करने में जितना हाथ रमेश बतरा, जगदीश कश्यप, कृष्ण कमलेश, भगीरथ, सतीश दुबे, बलराम अग्रवाल, विक्रम सोनी, सुकेश साहनी, विष्णु प्रभाकर, हरिशंकर परसाई, आदि समकालीन लघुकथाकारों का रहा है उतना ही कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, बलराम, कमल चोपड़ा, सतीशराज पुष्करणा, अशोक जैन,योगराज प्रभाकर रवि प्रभाकर, राजेश शॉ, सतीश राठी, बी. एल. अच्छा, उमेश महादोषी आदि संपादकों का भी रहा है। समकालीन लघुकथाकारों में दीपक मशाल, भुपिंदर कौर सढौरा, विनय कुमार सिंह, चंद्रेश कुमार छ्तलानी, सुधीर द्विवेदी,सीमा सिंह,अमरेश गौतम'अयुज', ज्योत्स्ना सिंह, विरेंदर 'वीर' मेहता, विभा रश्मि, शोभना श्याम, मधु जैन, सरस्वती माथुर, पूनम डोगरा, कान्ता रॉय, शोभा रस्तोगी, अंतरा करवड़े, सुनील वर्मा, पवन जैन, नरेश टाँक, उपमा शर्मा, मून्नू लाल, कुमार गौरव, रोहित शर्मा, हेमंत राणा,पदम गोधा, चितरंजन मित्तल, सतविंदर कुमार, शेख शहजाद उस्मानी, डॉ.लता अग्रवाल, डॉ. विनिता राहुरिकर, नयना आरती कानिटकर, मीना सिंह, नीना सिंह सोलंकी, जया आर्य, विभा रानी श्रीवास्तव आदि कई लेखक हैं जो इस विधा की उन्नति में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

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Last Access on:22/11/2017